Sunday, 18 December 2016

जानकारी आपकी , कमाई फेसबुक की, जी हाँ पढिये पुरी पोस्ट- www.gazabmedia.com

गजब मिडिया-  फ़ेसबुक इस बात का पूरा हिसाब रखता है कि आपकी पसंद-नापसंद, जीवनशैली, आदतें और ज़रूरतें क्या हैं, उसी हिसाब से वह टार्गेटेड विज्ञापन करके मोटी कमाई करता है.

इस साल की दूसरी तिमाही में उसकी कमाई 6.24 बिलियन डॉलर यानी करीब 41800 करोड़ रुपये रही.

इस तिमाही में मुनाफा रहा 2.1 बिलियन डॉलर या करीब 14010 करोड़ रुपये.
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हर बार जब आप लॉग इन करके थोड़ा समय फेसबुक पर बिताते हैं तो उसकी कमाई कुछ बढ़ जाती है.

उसकी पूरी कमाई में मोबाइल विज्ञापनों से हुई कमाई का हिस्सा रहा 84 फीसदी है जो पिछले एक साल में 81 फीसदी बढ़ गया है.

जून की तिमाही के अंत में फेसबुक के अब 171 करोड़ ग्राहक हैं.

2012 में 100 करोड़ के 'एक्टिव यूजर' के जादुई आंकड़े को पार करने के बाद भी उसके सब्सक्राइबर तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

लेकिन स्टैटिस्टा के आंकड़ों के अनुसार सबसे मज़ेदार बात ये है कि 157 करोड़ लोग फेसबुक को अपने स्मार्टफोन या टैबलेट पर इस्तेमाल करते हैं.

फेसबुक के सभी सब्सक्राइबर अपने बारे में जानकारी खुद ही देते रहते हैं.

लोग उसकी वेबसाइट को फ्री एक्सेस करके उस पर तरह-तरह की जानकारी जैसे ईमेल, मोबाइल फ़ोन नंबर, शहर के अलावा कई और भी जानकारी देते हैं.

ये ऐसी जानकारी होती है जैसे जन्मदिन, शादी की सालगिरह, बच्चों के नाम - जो ग्राहकों के बारे में मिलना आसान नहीं है.

और जब लाखों लोगों के बारे में ये जानकारी मिल सकती है तो उसके लिए एक कीमत चुकाने में कंपनियाँ नहीं हिचकती हैं.

लोकेशन के बारे में जानकारी देकर लोग फेसबुक को ये भी बताते हैं कि वो साल में कितनी बार छुट्टियां मनाने जाते हैं, कितनी बार घर से बाहर खाना खाते हैं या पिक्चर देखने जाते हैं.

बियर के गिलास के साथ आप अपनी तस्वीर शेयर करेंगे तो आपको पबों और बारों के विज्ञापन दिखाई देने लगेंगे जो शराब नहीं पीता उसको ऐसे ऐड दिखाकर क्या फ़ायदा?

अगर आपने अपनी नई कार की तस्वीर शेयर की है और आपकी लोकेशन भी मालूम है, मिसाल के तौर पर दिल्ली में महँगी कार चलाने वाले लोगों के समूह को ही महँगे सामान का विज्ञापन दिखाया जाए, ऐसे फ़ैसले करना काफ़ी आसान हो जाता है.

मिसाल के तौर पर चॉकलेट बनाने वाली कंपनियां तय कर सकती हैं कि वे सिर्फ़ टीनएजर लड़कियों को ही अपने विज्ञापन दिखाने हैं लेकिन अगर कोई फिटनेस ट्रैकर जैसे प्रोडक्ट बेच रहा है तो 30 साल के ऊपर लोगों तक भी पहुंचना चाहेगा.

ऐसे लोग जब अपने फेसबुक पेज पर लॉग इन करेंगे तो उन्हें वो विज्ञापन ही दिखाई देंगे.

ये सभी कंपनियां फेसबुक को इसके लिए भरपूर पैसे देती हैं क्योंकि टीवी या प्रिंट के विज्ञापन इतने निशाने पर नहीं लगते.

सब्सक्राइबर को उनके जन्मदिन पर फेसबुक पेज पर कंपनियों की तरफ से बधाई सन्देश भी भेजा जा सकता है क्योंकि ये जानकारी लोग खुद ही फेसबुक को देते हैं.

गूगल पर अगर आप खरीदने के लिए घड़ियाँ ढूंढ रहे हैं तो फेसबुक पर भी उसके विज्ञापन दिखाई देने लगते हैं, ऐसा संयोगवश नहीं, बल्कि रणनीति के तहत होता है.

लेकिन ऐसा नहीं है कि फेसबुक के बारे में सब कुछ बढ़िया चल रहा है.

जो औसत समय लोग फेसबुक पर बिताते हैं वो कम हो रहा है, जो विज्ञापन देने वाली कंपनियों के लिए बुरी ख़बर है.

अगर ये ट्रेंड जारी रहा तो वो फेसबुक के लिए चिंता की बात हो सकती है इसीलिए फेसबुक चाहता है कि आप उसकी वेबसाइट से लॉग आउट न करें ताकि आपका स्टेटस हमेशा लॉग इन वाला रहे.

ऐसे में कंपनियों को लगेगा कि आप ज़्यादा समय फेसबुक पर बिता रहे हैं.

स्मार्टफोन पर विज्ञापनों से कमाई में फेसबुक, ट्विटर के मुकाबले काफी आगे निकल गया है और अब गूगल के अलावा दूसरी कोई भी कंपनी उसे टक्कर देने में सक्षम नहीं दिखाई दे रही है.
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Wednesday, 30 November 2016

Facebook Hack- फेसबुक हैक करने की आसान ट्रिक! www.gazabmedia.com


गजब मिडिया-  आज की बढती रफ्तार को देखते हुये डिजिटल की दुनिया बहुत आगे चुकी है! हर कोई इन्टरनेट से जुड़ा हुआ है! वो किसी भी रुप में हो सकता है! अपनी वेबसाइट से,अपने ब्लॉग से, सरकारी योजना से, बैकं खाते से, आधार कार्ड से, शिक्षा से, जुऐ से, शेयर मार्किट से या फिर अपने सोशल मिडिया खाते े...!

अब अगर किसी चीज का निर्माण होता है तो दो पहलु निकलकर आते है,
1- Positive
2- Negative

Positive का मतलब उस चीज का वास्तविक रुप जो दुनिया के सामने होता है!
Negative का मतलब उस चीज का आन्तरिक रुप जो निर्माता के सामने होता है!

लेकिन इन सब के विपरित एक पहलु ऐसा भी होता है जो इन दोनो रुपो को एकत्र करके बनता है, और वो हैकिंग..
हैकिंग करने से पहले हम जान लेना होगा कि हैकिंग होती क्या है! तो हैकिंग का असल मकसद क्या होता है!

Hacking-
हैकिंग क्या है, और क्यो करते है हैकिंग?
जब किसी वस्तु या पदार्थ के आन्तिरिक रुप में बिना आज्ञा के बदलाव किया जाता है तो उस बदलाव को ही हैकिंग कहते है!
जैसे- किसी मशीन को पासवर्ड बिना खोलना, पेपर लिक होना है, बेहोसी की हालात में डॉक्टर द्वारा खुन या किडनी का निकालना, किसी भी दस्तावेज की चोरी होना, या फिर फेसबुक आईडी खोलना, ईमेल का पासवर्ड जान लेना आदि!
हैकिंग करने से नुकसान और फायदे दोनो है, अगर हम किसी के हित में कर रहे है तो फायदा जैसे- सीबीआई जाँच के लिये, पुलिस की छानबीन के लिये, किसी मृत व्यक्ति की जानकारी हासिल करना आदि/
और अगर हम हैकिंग बदले की भावना से करते है तो नुकसान के सिवा कुछ नही!

क्या आपको पता है कि हैकिंग की जॉब के लिये भी निकलती सरकारी रिक्तियाँ!
जी हाँ हैकर बनना कोई खेल नही, हैकर के लिये हमे कई कम्पुटरी भाषाओ का ज्ञान बहुत आवश्यक होता है! हैकिंग के लिये लाखो रुपये लेकर  कोर्स कराती है संस्थान, बहुत सारी युनिर्वसिटी ड्रिग्री कराती है!

ये तो हुयी कुछ जानकारी हैकिंग के बारे में कि हैकिंग क्या है, क्यो की जाती है, क्या संम्भावनाये है!
अब आपको बता देते है फेसबुक हैक करने का तरीका! लेकिन उससे पहले ये जान ले कि फेसबुक हैकिंग किसी भी गलत मकसद के लिये ना कि जाये, क्योकि साइबर क्राइम भी कुछ होता है! साइबर सुरक्षा हर वक्त आप नजर रखती है!
अगर आपको किसी की फेसबुक हैक करने की खास जरुरत हो जैसे, अपने बच्चो की एक्टीविटी पर ध्यान रखना हो, अपने कर्मचारी पर ध्यान रखना हो, अपने होने वाले पार्टनर पर नजर रखनी हो, या फिर किसी अन्य खास मकसद से तो ही आप इस ट्रिक का प्रयोग करें! किसी भी प्रकार की जाँच के उत्तरदायत्वि आप खुद होंगे!

फेसबुक हैक करें!
जैसा आपको बताया जाये बिल्कुल वैसे करते जाये आप किसी भी फेसबुक प्रोफाइल को हैक कर सकते है!
Step 1- सबसे पहले आप Mozilla App या Browser में अपनी फेसबुक खोले!
Step 2-  आप जिसकी फेसबुक हैक करना चाहते है अब उसकी प्रोफाइल फेसबुक सर्चबार में खोजे!
Step 3-  खोजने के बाद ऐड्रसबार से पुरा लिंक कॉपी कर लें!

Step4-  अब नीचे दिखाये गये ऐड पर किल्क करके उसे कम से कम 2 मिनट के लिये खोले, उसके बाद वापस इसी पेज पर आ जाये!
इस ऐड पर किल्क करके खोले!

Step 5-  अब निचे दिखाये गये लिंक पर किल्क करें, आपके सामने एक नयी पेज खुल कर आयेगा! उसमें एक आपको वो लिंक पेस्ट करना है जो आपने फेसबुक सर्च करके कॉपी किया था!
Step 6- उसके बाद फेसबुक हैक पर किल्क करे और फिर थोड़ी देर बाद आपकी फेसबुक हैक की फाइल बन जायेगी! अब आपको उसे डाउनलोड करना है!
Step 7-  हैकिंग फाइल डाउनलोड करते वक्त आपसे कोई टास्क या एप डाउनलोड करने के लिये पुछा जा सकता है तो आपको वो पुरा करना है!
Step 8-  ये सब करने के बाद आपकी फाइल खुलेगी जिसमें उस फेसबुक आइडी की रजिस्टर्ड ईमेल या फोन नंम्बर होगा और उसका पासवर्ड होगा, साथ में आखिरी वक्त जिस ब्राउजर में वह फेसबुक आइडी लॉगइन हुयी थी, उसका आईपी ऐडर्स और नाम होगा!
Step 9-  अब आपको Mozilla App या Browser में से अपनी फेसबुक लॉगआउट करनी है और हैक की गयी आइडी खोलनी है!

ध्यान रहे-  अगर आप इनमें से किसी भी एक स्टेप को नही अपनाते है या भुल जाते है तो फेसबुक हैक नही होगी!
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Tuesday, 29 November 2016

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन के अन्तर्गत आप भी कमा सकते है घर बैठे! Hindi Blast

गजब मिडिया : भारत सरकार की तरफ से संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंर्तगत उद्योग व सेवाक्षेत्र की इकाइयों की स्थापना की जा रही है। इसलिए पात्रों से उद्योग व सेवा के आवेदन मांगे जा रहे हैं। अब इच्छुक लोग घर बैठे ही आवेदन कर सकते हैं।


प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम वर्ष 2016-17 के अंर्तगत उद्योग व सेवा क्षेत्र की इकाइयों की स्थापना किए जाने के लिए लोन दिया जा रहा है। इसके लिए पात्र उद्यमियों से ऋण के लिए आवेदन मांगे हैं। अभी तक इस योजना में आवेदन करने के लिए लोगों को उद्योग केंद्र कार्यालय में जाकर आवेदन प्राप्त करना होता था। तीन पेज के इस फार्म को भरकर कार्यालय में जमा करना होता था। इस फार्म को भरना काफी मुश्किल हो रहा था। अब लोग आनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आनलाइन आवेदन में मात्र एक पेज का फार्म होगा।

जिसके पात्र व्यक्ति को आधार नंबर, खाता का विवरण, लगाई जाने वाली मशीनों के नाम व उनके मूल्य का विवरण देना होगा। योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, पिछड़ा वर्ग, विकलांग, अल्पसंख्यक एवं महिला उद्यमियों को ग्रामीण क्षेत्र में उद्योग स्थापना पर 35 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र के लिए 25 प्रतिशत मार्जिन मनी उपादान की व्यवस्था है। सामान्य वर्ग के पुरुषों के लिए ग्रामीण क्षेत्र हेतु 25 प्रतिशत व शहरी क्षेत्र के लिए 15 प्रतिशत मार्जिन मनी की व्यवस्था होगी। इसमें निर्माण क्षेत्र के लिए 25, सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये लोन की व्यवस्था है।

 जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त एसके मिश्रा ने बताया कि इसके लिए 30 जून तक आवेदन किया जा सकता है। आनलाइन आवेदन में आधार कार्ड नंबर, आवेदक का नाम, जन्म तिथि, शैक्षिक योग्यता, पता मय मोबाइल नंबर सहित, जहां यूनिट लगानी है उसका पता, लोन की जरूरत आदि का पूरा विवरण देना होगा। आवेदन मिलने के बाद विभागीय अधिकारी जांच कर आगे की कार्रवाई करेंगे।
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Friday, 25 November 2016

दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट बाजार बना हमारा देश भारत

नई दिल्ली- जैसा कि सभी जानते हैं कि चीन दुनिया का अपने 721M यूजर्स के साथ सबसे बड़ा इंटरनेट बाज़ार है. और इन यूजर्स ने निरंतर इजाफ़ा हो रहा है इसके साथ ही आपको बता दें कि अब भारत भी इस रेस में अपने आप को शामिल कर चुका है और अपने लगभग 333M यूजर्स के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट बाज़ार बना गया है.


जैसा कि सभी जानते हैं कि चीन दुनिया का अपने 721M यूजर्स के साथ सबसे बड़ा इंटरनेट बाज़ार है. और इन यूजर्स ने निरंतर इजाफ़ा हो रहा है इसके साथ ही आपको बता दें कि अब भारत भी इस रेस में अपने आप को शामिल कर चुका है और अपने लगभग 333M यूजर्स के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट बाज़ार बना गया है. और इसने अब US को भी पीछे छोड़ दिया है. ये आंकड़े कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट बाज़ार बना गया है, संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट से सामने आये हैं.


इसके साथ ही जैसा कि मैं ऊपर भी आपको बता चुका हूँ और UN ब्रॉडबैंड कमीशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट ने कहा है कि भारत US को पछाड़ कर अपने लगभग 260M मोबाइल ब्रॉडबैंड यूजर्स के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट बाज़ार बना गया है.

UN की एक रिपोर्ट जिसे "The State of Broadband 2016" नाम से प्रकाशित किया गया है, इसके अनुसार, दुनिया के टॉप 10 देश जो इंटरनेट पर सबसे ज्यादा निवेश करते हैं वह एशिया और मध्य पूर्व के देश हैं.

साउथ कोरिया इस मामले में 98.8% के साथ सबसे आगे है, इसके बाद Qatar (96%) और संयुक्त अरब अमीरात (95%) के साथ आते हैं.

इसके अलावा एशिया के कुछ देश इस मामले में लगभग 48% एक्टिव ब्रॉडबैंड सब्सक्रिप्शन के साथ आते हैं इसमें सिंगापुर आता है जहां 100 लोगों पर 142 सब्सक्रिप्शन देखें गए हैं. और इसके बाद फिनलैंड आता है जिसका आंकड़ा अगर देखें तो वह 144 है.

हालाँकि इसके अलावा अगर एक व्यक्ति द्वारा इंटरनेट की खपत पर अगर गौर करें तो यूरोपीय देशों ने अभी भी बाज़ी अपने नाम कर रखी है.

अगर आंकड़े पर गौर करें तो आइसलैंड अपने 98.2% ऐसे लोगों के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है जो सबसे अधिक इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद Luxembourg आता है, जो अपने 97.3% लोगों के साथ कुछ ही पीछे है. इसके अलावा अन्य देश जहां सबसे ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल किया जाता है वह सभी यूरोप के ही हैं. हालाँकि साउथ कोरिया एक यूरोपीय देश नहीं है.


इसके अलावा इस रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि लगभग 91 देश ऐसे हैं जहां लगभग 50% जनता ही ऑनलाइन हो पाई है. हालाँकि अगर 2014 की एक अन्य रिपोर्ट पर ध्यान दें तो लगभग सभी देश यूरोप के ही थे जो इस रिपोर्ट में शामिल किये गए थे, इसके साथ ही अगर आपको एक अन्य तथ्य से रूबरू करायें तो कहा जा सकता है कि बहराइन इस लिस्ट में सातवें स्थान पर था और जापान नौवें स्थान पर, और ये दोनों ही देश यूरोप के नहीं है.

इसके साथ ही इस रिपोर्ट ने इशारा किया है कि आने वाले समय में भारत और इंडोनेशिया इंटरनेट के बढ़ते प्रचार प्रसार के सबसे बड़े केंद्र बनने वाले हैं, यानी ये दो देश इंटरनेट का भविष्य होने वाले हैं. इसके अलावा एक आंकड़ा यह भी कहता है कि आज भी दुनिया के लगभग 3.9bn लोग इंटरनेट कि पहुँच से काफी दूर हैं. इन तक भी इंटरनेट पहुंचना जरुरी है.

आपको बता दें कि दुनिया में लगभग 6 देश- चीन, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया में अभी भी दुनिया की जनसंख्या का लगभग 55% ऑफलाइन है. ये एक बुरी खबर की ओर इशारा है!
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Wednesday, 23 November 2016

आप भी बन सकते है फेसबुक स्टार, कैसे,,, www.gazabmedia.com

नई दिल्ली-   अगर आप फेसबुक पर फेमस होना चाहते हैं, और अपनी एक अलग छवि बनाना चाहते हैं तो हम आपके लिए कुछ टिप्स लायें जिनके इस्तेमाल से आप फेसबुक स्टार बन सकते है इन टिप्स को पढ़कर आप बन सकते हैं

क्या है फेसबुक स्टार

आज भारत ही नहीं विश्व में भी फेसबुक एक सबसे सार्थक सोशल मीडिया नेटवर्क बन गया है. आजकल की अगर बात करें तो शायद ही कोई होगा जिसका फेसबुक पर अकाउंट न हो, ऐसे बहुत कम लोग हो सकते हैं, पर अगर इसके बढ़ते चलन पर गौर करें तो लगता है कि आज हर कोई फेसबुक से जुड़ा होगा, इसके पीछे इंटरनेट की बढती पहुँच को भी देखना बहुत जरुरी है. आजकल फेसबुक पर बहुत सारे लोगों के अकाउंट होते हैं, इन्हें से कुछ के बहुत फेमस होते हैं और कुछ के बिलकुल नहीं. अगर आप भी इनमें से एक हैं तो हम आपको बताते है कि कैसे आप फेसबुक के स्टार बन सकते हैं. हम आपके लिए कुछ उपयोगी टिप्स लेकर आयें जिनके माध्यम से आप एक स्टार बन सकते हैं- यहाँ हैं कुछ टिप्स जिन्हें आपको आज ही आजमाकर देखना चाहिए.




सामाजिक बने और ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुडें

सामाजिक बनने के लिए आपको लोगों से जुड़ने की जरुरत होती है फिर चाहे वह असल में हो या फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्क पर, तो लोगों से जुड़ना और उन्हें अपने साथ जोड़ना ही सामाजिक होना कहलाता है. आम जीवन में बेशक यह कठिन हो सकता है पर फेसबुक पर नहीं. यहाँ तो ऐसा करना बड़ा ही आसान है. बस आपको करना यह है कि अपने सारे ई-मेल कॉन्टेक्ट्स को फेसबुक पर इनवाईट करना है और ज्वाइन करना है. इसे आपके फेसबुक स्टार बनने का पहला कदम कहा जा सकता है. अर्थात् आपके जितने ज्यादा दोस्त होंगे आपके पोस्ट्स को उतने ही ज्यादा लाइक और कमेंट मिलंगे जो आपके लिए काफी अच्छा होगा. पर याद रखें अपनी इस लिस्ट में आसामाजिक तत्त्वों को शामिल करने से परहेज करें.



आकर्षक प्रोफाइल फोटो का चयन कीजिये

फेसबुक के लिए एक ऐसी तस्वीर का चयन करें, जिससे दूसरे लोगों पर प्रभाव पड़े और वह प्रभावित होकर आपको अपना दोस्त बना लें, खासतौर पर ध्यान रखें कि अपनी ही तस्वीर का इस्तेमाल करें, इससे आपके दोस्त आपको आसानी से खोज सकते हैं.


अपना पेज बनाएं

अगर आप किसी खास विषय की जानकारी रखते हैं या आप किसी वेबसाइट या ब्लॉग के मालिक हैं तो आपको फेसबुक पर अपना पेज बनाना चाहिए. यहाँ फेसबुक पर पेज बनाने पर आपको सभी सुविधाएं देनी चाहिए. ऐसा करने से आपकी फैन फोलोविंग को बड़े पैमाने पर बढ़ा सकते हैं


अपने बारें में सही जानकारी दें

फेसबुक पर अगर आप अपने ज्यादा से ज्यादा दोस्तों से जुड़ना चाहते हैं तो अपने बारे में सभी जानकारी सही भरें, अगर आप कोई गलत जानकारी भरते हैं तो आपके दोस्तों के लिए आपको तलाश करना बड़ा मुश्किल हो जाता है और आपके अकाउंट से उनका ध्यान भी हट जाता है. इसलिए अपनी सही जानकारी भरकर भी आप एक फेसबुक स्टार बन सकते हैं.

अपने टाइमलाइन पर दिखाई दे रही पोस्‍टों पर कमेन्‍ट करें

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अगर किसी से प्यार से बात करी जाए तो वह भी आपसे प्यार से ही बात करता है, ठीक उसी प्रकार यहाँ भी वही नियम लागू होता है. अगर आप किसी की पोस्ट्स पर लाइक और कमेंट करेंगे तो आपके द्वारा पोस्ट की गईं सामग्री पर भी आपको लाइक और कमेंट मिलेंगे. और जितने ज्यादा कमेंट और लाइक आपको मिलेंगे आप उतना ही प्रसिद्धि पा सकते हैं. तो इस टिप्स पर अमल करना आरम्भ करें और आप देखेंगे की आपको प्रसिद्धि बढ़ने लगी है और आप फेसबुक पर बहुत फेमस हो गए हैं.




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Sunday, 20 November 2016

PM मोदी को गन्दी गालियाँ देने वाली महिला की सच्चाई! www.gazabmedia.com

नई दिल्ली – नोटबंदी के बाद इन दिनों सोशल मीडिया पर एक महिला का वीडियो खूब शेयर किया जा रहा है, जिसमें एक तिलक लगाये हुए गृहणी मोदी को बहुत गन्दी-गन्दी गालियाँ दे रही है। इस विडियो को फैलाने का उद्देश्य जनता को यह दिखाना है कि मोदी की धन वापसी की नीति से सामान्य गृहणियों को इतनी तकलीफ हो रही है कि वह शर्म त्याग कर मोदी को गालियाँ दे रही हैं। Reality of a woman abusing Modi.

ये है इस वीडियो की सच्चाई –
इस वीडियो में महिला ने अपने माथे पर तिलक लगाया हुआ है जिससे लोगों को यह लगे कि वह हिंदू घर की है। इसके अलावा घर का बैकग्राउंड ऐसा दिखाया गया है जिससे यह महिला हाउस वाइफ़ लगे। इस वीडियो देख कर ऐसा लग रहा है जैसे यह महिला किसी हिन्दु फैमिली की हाउस वाइफ़ है और कैश ना मिलने की वजह से परेशान है। लेकिन सोशल साइट पर इस बारे में अब कुछ और ही सच्चाई शेयर की जा रही है। जांच में पाया गया यह विडियो फैब्रिकेटेड है। महिला का नाम नाजमीन शेख है।

ये महिला एक बार डांसर है –

दरअसल, एक महिला ने इस बारे में जो सच्चाई पोस्ट की गई है वो चौंकाने वाली है। महिला द्वारा किए गये पोस्ट के मुताबिक इस महिला का असली नाम नाजमीन शेख उर्फ़ नाज़िआ हनीफ़ है। इस पोस्ट में इस बात का दावा किया गया है कि ये महिला एक बार डांसर है। इसके अलावा पोस्ट में ये भी लिखा है कि हिंदुओं में नफ़रत फ़ैलने के उद्देश्य से इसने हिंदु जैसा गेट-अप अपनाया है।



लेकिन, हम इतना जरुर कहना चाहेंगे कि अफवाहों से सावधान रहें। यह देश के लिए ऐतिहासिक समय है। चंद लोग जो इस तरह कि अफवाहें फैला रहे हैं उनकी साजिश में न फसें। किसी भी खबर पर यकीन करने से पहले उसकी सच्चाई जरुर जान लें।
इस महिला ने प्रधानमंत्री मोदी जी को इतनी गन्दी गालियां दी है की हम उसे यहां दिखा नहीं सकते हैं, फिर भी अगर आप देखना चाहे तो नीचे लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं –



यहां क्लिक करें – VIDEO: प्रधानमंत्री मोदी को गाली दे रही है ये महिला

यूट्यूब लिंक – https://www.youtube.com/watch?v=7sxngMuTtLo
फेसबुक प्रोफाइल लिंक – FACEBOOK PROFILE: देखे इस महिला की फेसबुक प्रोफाइल

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Saturday, 19 November 2016

आत्म चेतन मशीन(रोबोट की दुनिया पृथ्वी पर) – संभावना, तकनीक और खतरे www.gazabmedia.com

मशीन मानव। एक ऐसी मानव कल्पना जिसमे मशीनें मानव को विस्थापित कर उसके अधिकतर कार्य करेंगी। मानवों का विस्थापन दोहरा अर्थ रखता है, यदि उसके द्वारा किये गये श्रम का विस्थापन हो तो वह मानव जाति के उत्थान मे सहायक हो सकता है। लेकिन यदि मशीनें मानव जाति को ही विस्थापित करने लग जाये तब यह स्थिति एक दू:स्वप्न को जन्म देती है।

क्या मशीनी मानव संभव है ? क्या मशीने मानव को विस्थापित कर सकती है? क्या मशीने मानव मस्तिष्क के तुल्य हो सकती है? क्या उनमें मानवों जैसी भावनायें आ सकती है? क्या कृत्रिम बुद्धी का निर्माण संभव है ? ढेर सारे प्रश्न है, ढेर सारी संभावनाएं !

टर्मीनेटर 2 : जजमेंट डे

    “लास एन्जेल्स, वर्ष 2029. सभी स्टील्थ बमवर्षक विमानो मे नये तंत्रिकीय संसाधक(neural processors) लगा दिये गये है और वे पूर्णतः मानव रहित बन गये है। उनमे से एक स्कायनेट ने ज्यामितीय दर से सीखना प्रारंभ किया है। वह 2:14 बजे सुबह पूर्वी अमरीकी समय अगस्त 29 को आत्म चेतन हो गया।

    “Los Angeles, year 2029. All stealth bombers are upgraded with neural processors, becoming fully unmanned. One of them, Skynet, begins to learn at a geometric rate. It becomes self-aware at 2:14 a.m. eastern time, August 29.”

यह जेम्स कैमरान द्वारा निर्देशित फ़िल्म “टर्मीनेटर 2- जजमेंट डे” मे दर्शाया गया भविष्य है। स्कायनेट का आत्म-चेतन होना और उसका मानवता पर आक्रमण मानव और रोबोट के मध्य एक युद्ध का आरंभ करता है और यही युद्ध टर्मीनेटर फिल्म श्रृंखला की हर फिल्म का पहला दृश्य होता है।

2000 ए स्पेस ओडीसी का Hal 9000

1950 के दशक के प्रारंभ से ही विज्ञान फतांसी फिल्मो मे रोबोट को मानव निर्मित एक ऐसी परिष्कृत मशीन के रूप मे दर्शाया जाता रहा है  जो वह ऐसे जटिल कार्य आसानी से कर सकती है जो मानव के लिये करना कठिन है। उदाहरण स्वरूप गहरी खतरनाक खानो मे खुदायी करना, सागर की तलहटी मे कार्य करना इत्यादि। इन  फिल्मो मे अक्सर रोबोट को आकाशगंगाओं के मध्य यात्रा करने वाले अंतरिक्षयानो के चालक और नियंत्रक के रूप मे दर्शाया जाता रहा है। दूसरी ओर इन रोबोटो को एक ऐसे खलनायक के रूप मे भी दर्शाया गया है जो भस्मासूर की तरह अपने निर्माता मानव को ही नष्ट कर देना चाहते है। इसके सबसे बडा उदाहरण आर्थर क्लार्के और स्टेनली कुब्रिक की फिल्म “2001 ए स्पेस

इस फिल्म मे HAL सारे अंतरिक्ष यान के परिचालन के अतिरिक्त , अंतरिक्षयात्रीयों से प्यार से बातें करता है, शतरंज खेलता है, चित्रो की सुंदरता का विश्लेष्ण करता है, यानकर्मीयों की भावनाओं को समझ लेता है लेकिन वह अभियान के पूर्व निर्धारित मूल उद्देश्य की पूर्ति के लिये वह पांच अंतरिक्षयात्रीयों मे से चार की हत्या भी कर देता है। अन्य विज्ञान फंतासी फिल्म जैसे “मैट्रिक्स” और “टर्मीनेटर” मे इससे भी भयावह चित्र का चित्रण किया गया है जिसमे रोबोट बुद्धिमान और आत्म जागृत हो कर मानव जाति को अपना ग़ुलाम बना लेते है।

बहुत कम ही फिल्मो मे रोबोट को एक विश्वसनिय सहयोगी के रूप मे दर्शाया गया है जो मानव के साथ सहयोग करते है और उनके खिलाफ षडयंत्र नही रचते है। राबर्ट वाईज की 1951 मे आई फिल्म “द डे द अर्थ स्टूड स्टिल” मे गार्ट पहला रोबोट(परग्रही रोबोट) है जो कैप्टन कलातु को मानवता को एक संदेश देने मे सहायता करता है। यह फिल्म दोबारा बनी जिसमे कैप्टन कलातु का पात्र किनु रीव्ज(मैट्रीक्स श्रृंखला के नियो) ने निभाया था।

जेम्स कैमरान द्वारा निर्देशीत एलीयंस 2 मे ’बिशप” एन्ड्राईड(एन्ड्राईड- मानव सदृश्य रोबोट)  का कार्य यात्रा के दौरान अंतरिक्षयान का परिचालन और यात्रीयों की सुरक्षा है। HAL और एलीयन 1 के रोबोट के विपरित बिशप पूरे अभियान के दौरान किसी त्रुटि का शिकार नही होता है और अपने कार्य के लिये ईमानदार रहता है। इस फिल्म के अंतिम दृश्यो मे बिशप को एलीयन दो टुकड़ो मे तोड देता है लेकिन वह एलन रीप्ले को बचाने ले लिये अपना हाथ देता है। जेम्स कैमरान की फिल्मो मे पहली बार किसी रोबोट पर विश्वास किया गया था और उसे एक नायक के रूप मे दर्शाया गया था।

ओडीसी” का कंप्यूटर “HAL 9000” है।
रोबोकाप

1987 मे आयी रोबोकाप मे एक रोबोट कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये मानवता की मदद करता है लेकिन वह पूर्णतः यांत्रिक नही है, वह सायबोर्ग है जोकि यंत्र और जैविक प्रणाली का मिश्रण है; आधा मानव, आधा मशीन।

इन सभी फिल्मो मे मानव मन मे तकनीक पर चल रहे अंतर्द्वद्व  को सफलतापूर्वक दर्शाया गया है, एक ओर इन फिल्मो मे मानव की तकनीक से चाहत दर्शायी गयी है; दूसरी ओर मानव मन मे अपनी ही द्वारा निर्मित तकनीक से भय दर्शाया गया है। एक ओर मानव रोबोट को अपनी एक ऐसी चाहत के रूप मे देखता है जो उसे अमरता प्रदाण कर सकती है और एक ऐसे मजबूत और अविनाशी कलेवर मे है जिसकी बुद्धिमत्ता, तंत्रिकातंत्र और क्षमता किसी मानव से कई गुणा बेहतर है। दूसरी ओर उसके मन मे डर समाया हुआ है कि अत्याधुनिक तकनीक जो आम लोगो के लिये रहस्यमयी है ,उसके नियंत्रण से बाहर जा सकती है और अपने ही निर्माता के विरोध मे कार्य कर सकती है, और यही डर HAL 9000, टर्मीनेटर और मैट्रिक्स मे दिखाया गया है। आइजैक आसीमोव द्वारा उनके रोबोटो मे प्रयुक्त पाजीट्रानीक मस्तिष्क मे भी यही भय अंतर्निहीत है, वह ऐसी आधुनिक तकनीक से निर्मित है जिसकी सूक्ष्म स्तर पर कार्यप्रणाली को वर्तमान मे कोई नही जानता है और इन रोबोटो का निर्माण कार्य पूर्णतः स्वचालित है।

कंप्यूटर विज्ञान मे हालिया प्रगति ने नये विज्ञान फतांशी रोबोटो के गुणों को भी प्रभावित किया है।  कृत्रिम न्युरल नेटवर्क ने टर्मीनेटर रोबोट पर प्रभाव डाला है, वह बुद्धिमान है तो है ही, साथ ही मे वह अनुभव से सीख भी सकता है।

इस फिल्म मे टर्मीनेटर रोबोट काल्पनिक रोबोट की प्राथमिक अवस्था वाला प्रतिरूप है। वह चल सकता है, बोल सकता है, मानव के जैसे देख और व्यवहार कर सकता है। उसकी बैटरी 120 वर्ष तक ऊर्जा दे सकती है साथ मे ही किसी अप्रत्याशित दुर्घटना की अवस्था मे उसके पास पर्यायी ऊर्जा व्यवस्था है। लेकिन इस सबसे  महत्वपूर्ण है कि वह सीख सकता है। उसे नियंत्रण करने के लिये न्युरल-नेट प्रोसेसर है, जो अपने अनुभव से सीखने वाले कंप्यूटर है।

इस फिल्म मे दार्शनिक कोण से सबसे रोचक बात यह है कि यह एक ऐसा न्युरल प्रोसेसर है कि वह घातांकी दर(exponential rate) से सीखता है और कुछ समय पश्चात आत्म-जागृत हो जाता है। इस तरह से यह फिल्म महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है जो कृत्रिम चेतना से संबधित है। क्या रोबोट मे कृत्रिम चेतना आ सकती है, क्या वे आत्म जागृत हो सकते है ? यदि हाँ तो इसके क्या परिणाम होंगे ? इस कृत्रिम चेतना, आत्म जागृति के दुष्परिणामो से कैसे बचा जाये ?
क्या एक मशीन आत्म जागृत हो सकती है?

एलन ट्युरींग

इस प्रश्न पर विचार करने से पहले हमे एक और प्रश्न का उत्तर देना होगा “हम कैसे माने कि कोई बुद्धिमान वस्तु आत्म-चेतन है?” 1950 मे एलन ट्युरींग के सामने यही समस्या थी लेकिन वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबधित थी। एलन ट्युरींग के सामने प्रश्न था कि हम किसी मशीन को मानव के जैसे बुद्धिमान कैसे माने। उन्होने इसके लिये एक प्रसिद्ध जांच प्रक्रिया बनायी जिसे ट्युरींग टेस्ट कहते है। इसके अनुसार दो कुंजीपटल है, एक कंप्यूटर से जुडा है, दूसरा एक व्यक्ति के पास है। एक जांचकर्ता अपने पसंदिदा किसी भी विषय पर कुछ प्रश्न टाईप करता है , दोनो कंप्यूटर और व्यक्ति उन प्रश्नों का उत्तर टाईप करते है और जांचकर्ता उन उत्तरो को एक स्क्रीन पर देखता है। यदि जांचकर्ता उन उत्तरो को देखकर यह तय नही कर पाये कि कौनसा उत्तर मानव ने दिया है और कौनसा उत्तर कंप्यूटर ने  तब हम कह सकते है कि मशीन ने ट्युरींग टेस्ट पास कर ली है। अब तक किसी मशीन ने ट्युरींग टेस्ट पास नही की है।( इसके अपवाद कुछ विशेष विषय जैसे शतंरज जैसे खेल है जिसमे कंप्यूटर मानव पर भारी पढ़ा है।)

मई 11, 1997 को इतिहास मे प्रथम बार डीप ब्ल्यु नामक कंप्यूटर ने विश्व शतरंज चैंपीयन गैरी कास्पोरोव को 3.5 – 2.5 के स्कोर से हराया था। लेकिन ध्यान रखें कि डीप ब्ल्यु को शतरंज की समझ नही है, वह केवल कुछ नियमों का पालन कर पता करता है कि किस चाल को चलने से वह बेहतर स्थिति मे होगा और यह नियम कुछ मानव शतरंज खिलाडीयो द्वारा डीप ब्ल्यु की स्मृति मे डाले गये है। यदि हम ट्युरींग के दृष्टिकोण से देखें तो कह सकते है कि डीप ब्ल्यु शतरंज बुद्धिमान तरीके से खेलता है लेकिन हम यह भी कह सकते हैं कि वह नही जानता कि उसकी चालों का अर्थ क्या है, यह ठीक उसी तरह से है जैसे टीवी को उस पर दिखायी जा रही तस्वीरों का अर्थ नही मालूम होता है।

किसी बुद्धिमान वस्तु के आत्म-चेतन होने की जांच तो और भी बडी़ समस्या है। तथ्य यह है कि बुद्धिमत्ता बाह्य व्यवहार से प्रदर्शित होती है और यह एक ऐसा गुणधर्म है जिसी भिन्न जांच मानको से मापा जा सकता है, लेकिन आत्म-चेतन हमारे मस्तिष्क का आंतरिक व्यवहार है जिसे मापा नही जा सकता है।

शुध्द दार्शनिक दृष्टिकोण से किसी अन्य मस्तिष्क मे चेतना की उपस्थिति नही मापी जा सकती है, यह एक ऐसा गुणधर्म है को उसका धारक ही माप सकता है। हम किसी अन्य मे मस्तिष्क मे प्रवेश नही कर सकते है, इसलिये हम यह तय नही कर सकते हैं कि उसमे चेतना है या नही। इस तरह की समस्याओं के बारे मे डगलस होफ्स्टैडटर और डैनीयल डेन्नेट ने अपनी पुस्तक “द माइंड्स आई” मे चर्चा की है।

व्यावहारिक दृष्टिकोण से हम ट्युरींग की जांच प्रक्रिया का प्रयोग कर सकते है और किसी भी वस्तु को आत्म-चेतन मान सकते है जब वह एक निर्धारित जांच प्रक्रिया मे सफल होकर अपने आप को आत्म-चेतन सिद्ध कर दे। मानवों मे भी यह विश्वास कि अन्य व्यक्ति भी आत्म-चेतन है, इसी तरह की मान्यताओं पर आधारित है: हमारे पास एक जैसे अंग है, हमारे पास एक जैसे मस्तिष्क है, इसलिये यह मानना कि सामने खड़ा व्यक्ति भी आत्म-चेतन है विवेकपूर्ण होगा। अपने सबसे अच्छे मित्र के आत्म-चेतन होने पर कौन प्रश्न उठायेगा?  हालाँकि यदि हमारे सामने खड़ा व्यक्ति भले ही मानव जैसे व्यवहार कर रहा हो लेकिन  वह कृत्रिम मांसपेशीयों , कृत्रिम अंगो और न्युरल प्रोसेसर का प्रयोग कर रहा हो तो शायद हमारा निर्णय अलग हो।

कृत्रिम न्युरल नेटवर्क के उदय से कृत्रिम चेतना और भी रोचक हो गयी है, क्योंकि न्युरल नेटवर्क  हमारे मस्तिष्क के जैसे ही विद्युत संकेतो का प्रयोग करता है और हमारे मस्तिष्क द्वारा प्रयुक्त सूचना संसाधन के जैसे ही तरिको का प्रयोग करता है।

हालांकि यह सभी मानते है कि वर्तमान कंप्यूटर प्रक्रिया आधारित कृत्रिम मस्तिष्क कभी भी आत्म-चेतन नही हो सकता लेकिन क्या यह हम न्युरल नेटवर्क के बारे मे कह सकते है? यदि हम विभिन्न जैविक और कृत्रिम मस्तिष्कों के मध्य संरचनात्मक विभिन्नताओं को हटा दें तो यह मुद्दा धार्मिक बन जाता है। दूसरे शब्दो मे यदि हम माने कि मानव चेतना किसी दैविक शक्ति द्वारा प्रदान की गयी है तो यह स्पष्ट है कि कोई भी कृत्रिम वस्तु मे आत्म-चेतना नही आ सकती है। लेकिन यदि हम माने कि मानव चेतना एक  विद्युत न्युरल अवस्था है को जटिल मस्तिष्क द्वारा सहज तरिके से निर्मित है तब एक कृत्रिम आत्म-चेतन मस्तिष्क के निर्माण की संभावना प्रबल हो जाती है। यदि हम यह माने कि चेतना मस्तिष्क का भौतिक गुणधर्म है तब प्रश्न उठता है कि
कब कंप्यूटर आत्म-चेतन हो पायेगा ?

इस प्रश्न का उत्तर देना खतरनाक हो सकता है! लेकिन इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले हमे कंप्यूटर के आत्म चेतन होने के लिये एक ऐसी न्युनतम सीमा बनानी होगी, जिसके बिना एक मशीन आत्म-चेतना विकसीत नही कर सकती हो। हम यह मानकर चलते हैं कि आत्म-चेतना का विकास होने के लिये न्युरल नेटवर्क को कम से कम मानव मस्तिष्क के तुल्य जटिल होना चाहिये।

मानव मस्तिष्क मे लगभग 1012 न्युरान है और हर न्युरान लगभग 1013 अन्य न्युरानो से जुडा होता है, इस तरह इस नेटवर्क मे औसतन कुल 1015 सूत्रयुग्मन(synapses) होते है। कृत्रिम न्युरल नेटवर्क मे एक सूत्रयुग्म को एक वास्तविक संख्या (Floating point) के रूप रखा जा सकता है, वास्तविक संख्या को कंप्यूटर मे रखने के लिये 4 बाईट चाहिये। इस तरह से 1015 सूत्रयुग्म के लिये कुल 4*1015 बाईट(40 लाख गीगाबाईट) चाहीये होगी। चलो मान लेते है कि संपूर्ण मानव मस्तिष्क को जैसे व्यवहार करने के लिये 80 लाख गीगाबाईट चाहीये होगी, इसमे हमने न्युरान द्बारा उत्पन्न संकेतो और भिन्न आंतरिक मस्तिष्क अवस्थाओं को संरक्षित रखने के लिये आवश्यक जगह भी जोड ली है। अब प्रश्न उठता है कि इतनी कंप्यूटर स्मृति कब तक उपलब्ध होगी ?
 इतनी कंप्यूटर स्मृति कब तक उपलब्ध होगी ?

पिछले 30 वर्षो मे RAM की क्षमता हर वर्ष ज्यामितीय रूप से हर चार वर्ष मे दस गुनी होते जा रही है। नीचे दी गयी सारणी मे 1980  से अब तक सामान्य निजी कंप्यूटरों मे लगी RAM दर्शायी गयी है।
RAM क्षमता का विकास

इन आंकड़ो की सहायता से हम वर्ष और RAM क्षमता के मध्य एक गणितिय संबंध प्राप्त कर सकते है।

byte=10[(year-1966)/4]

उदाहरण के लिये इस समीकरण से प्राप्त कर सकते हैं कि 1990 मे एक निजी कंप्यूटर मे 1 मेगा बाईट RAM थी, 1998 मे एक निजी कंप्यूटर मे 100 मेगा बाईट RAM थी। इस सूत्र की सहायता से किसी भी वर्ष मे किसी निजी कंप्यूटर मे कितनी RAM होगी इसका अनुमान लगाया जा सकता है।(हम मानकर चल रहे हैं कि RAM क्षमता इसी दर से बढते जायेगी।)

वर्ष = 1966+ 4log10 (bytes)

अब हमे यह ज्ञात करना है किस वर्ष मे किसी निजी कंप्यूटर मे 80 लाख गीगा बाईट की क्षमता प्राप्त होगी।  इस सूत्र मे हम इस संख्या को रख देते है और हमे उत्तर प्राप्त होता है:

वर्ष = 2029

यह एक मजेदार संयोग है कि टर्मीनेटर फिल्म मे भी इसी वर्ष स्कायनेट आत्म-चेतन हुआ था।

अब इस परिणाम का अर्थ को पूरी तरह से समझने के लिये प्रथम हमे कुछ और अन्य तथ्यों पर भी  गौर करना होगा। सबसे पहले गणना की गयी दिनांक एक आवश्यक शर्त के लिये है लेकिन कृत्रिम चेतना के लिये वह संपूर्ण शर्त नही है। इसका अर्थ है कि एक शक्तिशाली कंप्यूटर जिसमे लाखों गीगाबाईट RAM हो कृत्रिम चेतना के लिये पर्याप्त नही है। इसके अतिरिक्त भी कई सारे कारक है, जैसे कृत्रिम न्युरल नेटवर्क के सिद्धांत मे विकास, मानव मस्तिष्क के जैविक प्रक्रिया को ज्यादा अच्छे तरीके से समझना। मानव मस्तिष्क और कंप्यूटर मे सबसे बड़ा अंतर समस्याओं को हल करने की विधि मे है। कंप्यूटर को इस तरह से निर्देश दिये जाते है किं वह कोई  त्रुटि ना करे, वह जिस तरह से निर्देशो का पालन करते है वह मानव मन को हास्यास्पद लगेगा। यदि किसी मानव से पूछा जाये कि किसी भी दो क्रमिक  पूर्णांक संख्याओं के योग को दो से भाग दिया जाये तो क्या उत्तर पूर्णांक मे आयेगा? मानव इसका उत्तर देगा “नहीं” क्योंकि वह उत्तर जानता है। लेकिन जब यही प्रश्न कंप्यूटर से पूछा जाये, वह उत्तर नही जानता। वह उत्तर पाने के लिये गणना प्रारंभ करेगा। वह सबसे पहले 1 और 2 को जोडेगा और परिणाम मे आये 3 को 2 से भाग देगा , परिणाम आयेगा 1.5, अर्थात “नही”। अब कंप्यूटर अगला युग्म 2 और 3 लेकर प्रक्रिया दोहरायेगा। कंप्यूटर यह प्रक्रिया तब तक दोहरायेगा जब तक उसे उत्तर “हां” ना मिले। इस उदाहरण मे उसे “हां‘’ कभी नही मिलेगा और वह इस चक्र मे फंस जायेगा। किसी मानव को उसकी गणन प्रक्रिया जबरन रोकनी होगी। कंप्यूटर यह समझने मे असमर्थ है कि उसे इस गणन प्रक्रिया मे कभी “हाँ” मे उत्तर नही मिलेगा। हम कंप्यूटर मे यह सूचना डाल सकते है कि  “किसी भी दो क्रमिक पूर्णांक संख्याओं के योग को 2 से भाग देने पर पूर्णांक नही मिलेगा”। अब इस सूचना के डालने के बाद अगली बार कंप्यूटर इस प्रश्न का उत्तर दे पायेगा। लेकिन समस्या यह है कि ऐसे लाखों प्रश्न है, जो मानव मस्तिष्क सहज रूप से उत्तर दे सकता है और उन सभी प्रश्नों के उत्तर को कंप्यूटर मे सूचना के रूप मे भरना असंभव है। मानव के साथ ऐसा नही है, उसे आप बस गणित से सामान्य नियमों के बारे मे बता दे और वे अपने ज्ञान के आधार पर किसी भी अन्य गणितीय समस्या को हल कर लेंगें। मानव के पास समझ है लेकिन कंप्यूटर के पास केवल नियम और निर्देश।

ये सभी कारक किसी आत्म-चेतन कंप्यूटर के निर्माण की दिनांक के अनुमान को असंभव सा बना देते है। एक तर्क यह दिया जा सकता है कि यह गणना तो निजी कंप्यूटर के लिये की गयी है जोकि इस क्षेत्र मे उच्च स्तर का तकनीकी विकास नही है। यह भी तर्क दिया जा सकता है कि इतनी RAM किसी नेटवर्क के कंप्यूटरो द्वारा या हार्ड डिस्क की स्मृति के आभासी स्मृति (Virtual Memory) प्रबंधन द्वारा भी उपलब्ध करायी जा सकती है। लेकिन हम किसी भी गणना पद्धति को लेकर चले उपर गणना की गयी तिथि तो ज्यादा से ज्यादा कुछ वर्ष ही पहले लाया जा सकता है।

इतने सारे विचार विमर्श के पश्चात प्रश्न आता है कि
एक आत्म-चेतन मशीन की आवश्यकता क्यों है?

नैतिक मूल्यों को एक तरफ रख कर सोचा जाये तो यह तय है कि आत्मचेतन मशीन का निर्माण एक मील का पत्थर होगा और तकनीकी क्षेत्र मे एक क्रांति होगा। यह मानव मन के नये क्षितिज को छूने की सनातन चाहत के लिये सबसे बड़ी प्रेरणा होगी और विज्ञान विकास मे एक नया मोड होगा। एक ऐसे कृत्रिम मस्तिष्क का निर्माण जो जैविक मस्तिष्क पर आधारित हो, हमारे ज्ञान के तेजी और भरोसेमंद तरीके से स्थानांतरित करने मे सहायक होगा और अमरता की ओर एक कदम होगा। मानव एक कमजोर शरीर के बंधन से मुक्त हो कर कृत्रिम अंगो  की सहायता से अमर हो जायेगा और इन कृत्रिम अंगो मे मस्तिष्क भी शामिल होगा। इस अमर शरीर के प्रयोग से मानव ब्रह्मांड के उन भागो की यात्रा कर सकेगा जिनमे जाने के लिये सैकडो वर्ष लग सकते है। वह परग्रही सभ्यता की तलाश मे अनंत यात्रा पर जा सकेगा, सौर मंडल की मृत्यु पर नये घर की तलाश मे जा सकेगा, श्याम विवर की ऊर्जा के उपभोग के रास्ते की तलाश मे जा सकेगा, इसके अतिरिक्त वह मानव मन को प्रकाशगति से अन्य ग्रहो पर भेज सकेगा।

बाह्य अंतरिक्ष मे बुद्धिमान जीवन की खोज 1972 के पायोनियर 10 यान से प्रारंभ हो गयी थी, इस यान मे मानव सभ्यता और पृथ्वी ग्रह के बारे मे सूचनायें है। मानव प्रजाति द्वारा की गयी सभी खोजो मे नाभिकिय ऊर्जा से परमाणु बम तक, जेनेटिक इंजीनियरींग से मानव क्लोम तक सबसे बड़ी समस्या रही है कि तकनीक को नियंत्रण मे कैसे रखा जाये, जिससे वह मानव जाति के विकास मे सहायक हो, उसके विनाश मे नही। अगला प्रश्न है कि
आत्म-चेतन मशीन को मानव नियंत्रण मे कैसे रखा जाये ?

इस प्रश्न का उत्तर आइजैक आसीमोव अपनी कहानी मे “रन अराउंड” मे दे चुके है। उन्होने आत्मचेतन मशीन को मानव नियंत्रण मे रखने के लिये तीन नियम बनाये है। उनके अनुसार हर आत्मचेतन मशीन को इन तीन नियमों का पालन करना होगा। ये तीन नियम है

    कोई रोबोट किसी मानव को हानि नही पहुंचायेगा या अपनी किसी निष्क्रियता द्वारा किसी मानव को हानि पहुंचने नहीं देगा।
    रोबोट मानव द्वारा दिये गये निर्देशो का पालन करेगा बशर्ते वे निर्देश नियम एक का उल्लंघन ना करते हों।
    रोबोट  स्वयं के अस्तित्व की रक्षा करेगा बशर्ते उसकी रक्षा मे नियम एक और दो का उल्लंघन ना हो!

कुछ अन्य कहानीकारों ने इन नियमों मे कुछ कमियाँ भी निकाली है लेकिन ये तीन नियम मानवता पर किसी मानव निर्मित आत्म चेतन मशीन द्वारा आक्रमण से बचने के लिए एक आधार बन सकते है। आत्म चेतन मशीन के निर्माण तक आवश्यकता अनुसार इन तीन नियमों को और भी प्रवर्धित किया जा सकता है।

स्टार ट्रेक का एन्ड्राइड लेफ्टीनेंट कमांडर डाटा
आत्म-चेतन मशीन और नैतिकता

मशीन/रोबोटो मे आत्मचेतना का उद्भव कुछ नैतिक प्रश्नो को भी जन्म देता है।  स्टार ट्रेक के एक एपीसोड मे आत्मचेतन रोबोट के स्वामित्व का प्रश्न उठाया गया था, इस धारावाहिक मे लेफ्टीनेंट कमांडर डाटा एक आत्म चेतन रोबोट है। इस एपीसोड मे प्रश्न था कि डाटा को फेडरेशन की संपत्ति माना जाये या एक स्वतंत्र आत्मचेतन व्यक्तित्व। अंत मे डाटा की विजय हुयी थी और उसे एकस्वतंत्र आत्मचेतन व्यक्तित्व माना गया था। लेकिन कुछ और प्रश्न रह जाते है।

    जब रोबोट आत्मचेतन है तो उन्हे मानवो के समकक्ष माना जाये ?
    क्या उनके भी मानवाधिकार के जैसे रोबोअधिकार होंगे ?
    मानवो मे दासता प्रथा का अंत हो चुका है, इस परिप्रेक्ष्य मे आत्मचेतन रोबोटो का स्वामित्व किसका होगा ?
    मानवो और आत्मचेतन रोबोटो के अधिकारो मे संतुलन किस तरह रखा जाये कि वे एक दूसरे के सहअस्तित्व मे रह सके जिससे मैट्रिक्स या टर्मीनेटर जैसी स्थिति उत्पन्न ना हो।

मानवता की गरिमा पर हमला

1976 मे जोसेफ वेइजेनबम ने कहा था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग उन पदो के प्रतिस्थापना के लिये नही किया जाना चाहिये जिन पदो के लिये सम्मान, जिम्मेदारी और सावधानी की आवश्यकता हो। उदाहरण स्वरूप:

    ग्राहक सेवा प्रतिनिधि (वर्तमान मे इस पद के लिये ध्वनि आधारित सेवा तकनीक का प्रयोग हो रहा है और ग्राहको की परेशानी का एक कारण भी है क्योंकि इस सेवा मे एक मानवीय पहलू का अभाव होता है।)
    चिकित्सक
    सेवा टहल के लिये आया
    न्यायाधिश
    पुलिस आफीसर

जोसेफ वेइजेनबम का मानना था कि इन सभी पदो के लिये वास्तविक मानवीय भावनाओं की आवश्यकता होती है। यदि इन पदो को मशीनों से प्रतिस्थापित कर दिया जाये तो हम अपने आप को समाज से विमुख, अवमुल्यित और कुंठित बना देंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस तरह से प्रयोग मानवता की गरिमा पर हमला होगा।
निष्कर्ष

आत्मचेतन मशीन संभव है लेकिन कब ? इस प्रश्न का सही उत्तर पाना कठिन है। किसी आत्म चेतन मशीन का निर्माण कई सारे नये नैतिक और तकनीकी प्रश्नों को जन्म देगा, इन प्रश्नों के उत्तर तकनीक के विकास के साथ मिलते जायेंगे। इस विकास के मार्ग मे ढेर सारे विरोध भी होंगे, जिनमे से कुछ धार्मिक, नैतिक रूप के भी होंगे, लेकिन विज्ञान और तकनीक के विकास मे ये विरोध हमेशा से रहे है। इतना तय है कि भविष्य आत्मचेतन मशीनो और मानवो के सह-अस्तित्व का होगा।
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Reliance Jio का नया ऑफर जो पिछले ऑफर से भी बड़ा है, www.gazabmedia.com

नई दिल्ली। Reliance Jio अब एक और नया धमाका करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि कंपनी वेलकम ऑफर के बाद अब जल्द ही फाइबर इन्टरनेट प्लान लॉन्च कर सकती है। अगर मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, कंपनी यूजर्स को महज 83 पैसा में 1GB इन्टरनेट डाटा देगी और इसकी स्पीड 15Mbps से शुरू होकर 600Mbps तक होगी।

कुछ ऐसा हो सकता है नया इन्टरनेट प्लान

रिलायंस जियो फाइबर इन्टरनेट में भी वेलकम ऑफर लॉन्च कर सकती है।
जिसमें यूजर्स को 500 रुपए में 600 GB डाटा दिया जाएगा।
इस लिहाज से देखें तो ग्राहक को GB के लिए करीब 83 पैसे चुकाने होंगे।
इसके अलावा 1000 रुपए के प्लान में 500GB डाटा 25Mbps स्पीड के साथ दिया जाएगा।
अगर इस प्लान पर ध्यान दिया जाए तो 1GB डाटा मात्र 2 रुपए में पड़ेगा।
इसके अलावा कुछ और बड़े प्लान लॉन्च हो सकते है।

 ऐसे हो सकते है हाईस्पीड और बड़े डेटा के प्लान
कुछ ज्यादा स्पीड वाले प्लान भी लॉन्च करने की संभावना है।
इस प्लान के तहत 1500 रुपए में 50Mbps स्पीड के साथ 2000GB डाटा दिया जाएगा।
वहीं, 5500 रुपए में 600Mbps स्पीड के साथ 300GB डाटा दिया जाएगा।
उपरोक्त प्लान्स के बारे में जिओ ने अभी तक कोई पुष्टि नहीं की है।
माना जा रहा है कि जल्द ही कंपनी इन प्लान्स को पेश करेगी।
आपको बता दें कि ग्राहक को गीगाफाइबर राउटर खरीदना होगा जिसकी कीमत 4000 रुपए से 6000 रुपए तक हो सकती है।


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Monday, 14 November 2016

हिंदुजा ग्रुप की कंम्पनी "अशोक लीलैण्ड" ने पहली बार भारत में बनी इलेक्ट्रिक बस लॉन्च की! www.gazabmedia.com

नई दिल्ली-  हिंदुजा ग्रुप की प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड ने अपनी पहली ‘मेड इन इंडिया’ इलेक्ट्रिक बस सर्किट पेश की। अशोक लैलेंड के प्रबंध निदेशक विनोद के दसी के अनुसार इस बस की क्षमता 35 से लेकर 65 यात्रियों तक की है। एक बार चार्ज होने के बाद, मानक परिस्थितियों में यह 120 किलोमीटर तक चल सकती है।



विनोद ने बताया कि इस उत्पाद में 22 करोड़ रुपए का शुरूआती निवेश किया गया है जबकि कुल मिलाकर 500 करोड़ रुपए का निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सर्किट सीरिज की बसें भारत के टेक्नोलॉजिकल इन्नोवेशन्स के दोहन के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दोहराता है। इस बस की लागत 1.50 करोड़ रपये से 3.50 करोड़ रपये के बीच होगी।

अशोक लीलैंड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (बस) टी वेंकटरमन ने कहा कि सर्किट बसों का विनिर्माण कंपनी के स्वामित्व वाले सभी सातों विनिर्माण इकाइयों में हो सकता है।

इलेक्ट्रिक कार के लिए इंडियन टीम की मदद लेगी रेनॉ निसान
रेनॉ निसान भविष्य में इलेक्ट्रिक कारों पर दांव लगाने जा रही है।
कंपनी की चेन्नई में मौजूद रिसर्च एंड डिवेलपमेंट टीम इसके अफोर्डेबल इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में योगदान देगी।
रेनॉ निसान के ग्लोबल सीईओ, कार्लोस घोन ने पेरिस मोटर शो के दौरान ईटी से कहा, ‘इलेक्ट्रिक कार हमारी इंडस्ट्री का फ्यूचर है।
सरकारी मदद काफी महत्वपूर्ण है और चीन की सरकार इलेक्ट्रिक कारों में काफी दिलचस्पी रखती है।
भारत में इलेक्ट्रिक कारों के लिए ज्यादा मदद उपलब्ध नहीं है।
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Sunday, 13 November 2016

"कुछ बेईमानों को पकड़ने के लिए जनता को परेशान कर रही है सरकार"- केजरीवाल www.gazabmedia.com

नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की जनता से 50 दिन दिक्कतों को सहने वाले भाषण के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है। केजरीवाल ने कहा कि देश की जनता 50 घंटे तक भी जनता इंतजार करने के मूड में नहीं है और पूरे देश में इमर्जेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
 केजरीवाल ने कहा, 'प्रधानमंत्री जापान से आए और उन्‍होंने नोटबंदी के कारण लोगों को हो रही दिक्‍कत के मद्देनजर 50 दिन तक सहयोग करने की मांग की। तो क्‍या आम आदमी अगले 50 दिनों तक और कष्‍ट उठाता रहेगा।


'सवा सौ करोड़ को क्‍यों दुखी किया'
आज बार-बार कहा कि सवा सौ करोड़ लोग तो ईमानदार हैं, कुछ लाख लोग बेईमान हैं। तो कुछ लाख लोगों को क्‍यों नहीं पकड़ते। सवा सौ करोड़ लोगों को क्‍यों दुखी कर रखा है इन्‍होंने।

'तो नहीं मिलता एक भी वोट'
केजरीवाल ने कहा कि अगर मोदी ने नोटबंदी के फैसले के बारे में चुनाव से पहले बता दिया होता तो उन्‍होंने एक भी वोट नहीं मिलता।

फैसला वापस लेने की मांग
इसके साथ ही केजरीवाल ने मोदी से नोटबंदी के फैसले को वापस लेने की मांग की। उन्‍होंने कहा, 'मोदी जी अहंकार छोड़िए और नोटबंदी के फैसले को वापस ले लीजिए। नोटबंदी का फैसला वापस लेने के अलावा और कोई दूसरा उपाय नहीं है।'
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जब पैसे नही मिले तो जवान लडकी भड़क गयी और फिर गुस्सायी लड़की ने उतार दिये अपने कपड़े! www.gazabmedia.com

नई दिल्ली (13 नवंबर): नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी लाइनें लगी हैं। ऐसे में लोग मारपीट पर भी उतारू हो गए हैं, लेकिन इस समय एक बड़ी खबर राजधानी दिल्ली से आई है। यहां पर मयूर विहार फेज-3 में एटीएम की लाइन में लगी एक युवती जब इंतजार करते-करते थक गई तो उसने विरोध स्वरूप गुस्से में टॉप ही उतार दिया।

युवती की इस हरकत से वहां लोग भौचक रह गए। फौरन वहां पुलिस पहुंच गई। लेडी पुलिस युवती को गाजीपुर थाने ले गई। वहां उसे समझाया गया। उसके बाद एटीएम ले जाकर उसे पैसे दिलाए गए...

- युवती के अचानक सरे बाजार टॉपलेस हो जाने से एकबारकी तो लोग सन्न रह गए।
- कुछ ही दूरी पर मौजूद लेडी पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को कपड़े पहनाए।
- फिर उसे गाजीपुर थाने ले जाया गया। बाद में उसे एटीएम ले जाकर अलग से पैसे दिलवाए गए।
- दिल्ली में जगह-जगह एटीएम पर लोगों की लंबी कतार लगी हुई है।
- देशभर में लोग रुपये निकालने के लिए एटीएम, डाकघर के आगे लाइन में लगे हुए हैं।

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Saturday, 12 November 2016

बीजेपी को उत्तर प्रदेश की सत्ता में नहीं आने देंगे मुस्लिम वोटर : मायावती

 नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) अध्यक्ष मायावती का मानना है कि यूपी विधानसभा चुनाव में मुसलमान वोटर 2014 की तरह अपने वोटों को बंटने नहीं देंगे और बीजेपी को सत्ता में आने से रोकेंगे.

हम गजब मिडिया के माध्यम से मायावती की एक्स्क्लूसिव बातचीत पोस्ट कर रहे है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में ना सिर्फ़ यूपी बल्कि पूरे देश में मुसलमान वोट बंटा हुआ था, लेकिन इस बार मुस्लिम समुदाय समाजवादी पार्टी में चल रही अंदरूनी तोड़फोड़ को देख रहा है और इसी वजह से समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देगा. उन्होंने भरोसा जताया कि मुसलमान वोट इस बार बीएसपी को जाएगा और जहां तक कांग्रेस की बात है वो यूपी में कहीं नहीं हैं.

मायावती को ये भी आशंका है कि चुनाव से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि यहां उन्होंने कहा कि ये दोनों पार्टियां इसमें कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि इस बार मतदाता बहुत ही जागरूक है.

बीएसपी प्रमुख ने यह भी कहा कि 1995 में मुझ पर समाजवादी पार्टी के युवाओं के हमले की साज़िश मुलायम सिंह यादव ने ही तैयार की थी. वहीं राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर आरोप लगाते मायावती ने कहा कि वह भी अपने पिता की तरह ही हैं, जो हिंसा के लिए युवाओं का इस्तेमाल करते हैं.
इसके साथ ही मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी जिन भी विकास योजनाओं का एलान कर रही है वह सभी मेरे समय पर शुरू की गई थीं, सपा सरकार ने सिर्फ़ इन योजनाओं का नाम बदला है.

मायावती ने यूपी चुनाव में कांग्रेस की मौजूदगी पर बात करते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस कहीं नहीं है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर आरोप लगाते मायावती ने कहा कि वह भी अपने पिता की तरही ही हैं जो हिंसा के लिए युवाओं का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार ने उनकी सरकार में शुरू की गई योजनाओं के नाम बदल दिए थे.
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UP के CM अखिलेश यादव की 'विकास रथ यात्रा' बनी 'दिवालिया रथयात्रा' : मायावती www.gazabmedia.com

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने यूपी के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव की 'विकास रथ यात्रा' को 'दिवालिया रथयात्रा'  करार दिया है. उन्‍होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार 'लक्जरी रथ' सपा सरकार के मुखिया की यात्रा के प्रारम्भ में ही दिवाला निकाल गया. यही नहीं, रथयात्रा के साथ चलने वालों ने जमकर हुड़दंग किया और पुलिस को केवल तमाशबीन बने रहने को मजबूर होना पड़ा.

    मायावती ने कहा, 'विकास रथयात्रा’के शुभारंभ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में सपा परिवार व सपा सरकार की मौजूदगी में समर्थक आपस में भिड़ गए. इसने प्रदेश में अराजकता की स्थिति की पोल खोल दी है. उन्‍होंने कहा कि सपा सरकार ने अगर जनहित व जनकल्याण के वास्तविक काम किए होते तो फिर उसे भारी सरकारी शान-शौकत के साथ यह 'विकास रथयात्रा' निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि  सपा शासनकाल में यूपी में केवल जातिवाद, द्वेष, भ्रष्टाचार एवं जंगलराज का बोलबाला रहा है और इसके लिए कई बार विभिन्‍न अदालतों से राज्‍य सरकार को फटकार मिलती रही है. राज्‍य में डेंगू जैसी घातक बीमारी ने इस तरह महामारी का रूप धारण कर लिया कि हाईकोर्ट को इसमें दखल देना पड़ा.

उन्‍होंने कहा कि जिस सपा सरकार पर प्रदेश की करीब 22 करोड़ जनता का ख़्याल रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी है, वह सिर्फ कुछ जिलों और मंडल के स्‍तर पर इक्का-दुक्का विकास की बात कर लोगों का वोट हासिल करना चाहती है. यह प्रदेश की जनता के साथ अन्याय नहीं तो और क्या है? मायावती ने आरोप लगाया कि बीजेपी से भी सपा की मिलीभगत है, इसी कारण सपा सरकार के मुखिया, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के खिलाफ इशारों-इशारों में बात करते हैं और खुलकर आलोचना करने से हिचकते हैं.


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मोबाईल फोन से Cache n Cookies कैसे Delete करें! जिससे आपके फोन की स्पीड बढ जायेगी! www.gazabmedia.com



नई दिल्ली-  आज-कल हर कोई स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहा है। स्मार्टफोन का लगातार इस्तेमाल करने में कई सारी समस्याए होने लगती है। स्मार्टफोन कभी हैंग होने लगता है और कभी अपने आप रीस्टार्ट होने लगता है। इन सब समस्याओ को दूर करने के लिए हमें अपने फ़ोन से एप्प की कैश मेमोरी को क्लियर करना पड़ता है। फ़ोन से एप्प की कैश मेमोरी को कई तरीको से क्लियर जा सकता है।


कई लोग हर एक एप्प में जाकर कैश को क्लियर करते है। लेकिन ऐसे भी तरीके है जिनसे हम एक साथ सारे एप्प की कैश मेमोरी को क्लियर कर सकते है। अगर आप भी अपने फ़ोन से एप्प की कैश मेमोरी को एक साथ क्लियर करना चाहते है तो निचे दिए हुए तरीको को अपनाए इससे आप आसानी से कुछ ही टाइम में एक साथ अपने फ़ोन की एप्प की कैश मेमोरी को क्लियर कर सकते है।
एप्प की कैश को एक साथ क्लियर करने के आसान तरीके (Tips for Clearing Smartphone App Cache at Once)

मेथड 1- सेटिंग (By Setting)

आप अपने फ़ोन की सेटिंग की मदद से अपने फ़ोन के एप्प की कैश को आसानी से एक साथ क्लियर कर सकते है। अगर आप अपने फ़ोन की सेटिंग से कैश को क्लियर करना चाहते है तो इन स्टेप को अपनाए ।

स्टेप 1- सेटिंग में जाए

स्टेप 2- स्टोरेज को सेलेक्ट करें

स्टेप 3- कैश डाटा को सेलेक्ट करें

स्टेप 4- अब आपके सामने एक डायलॉग बॉक्स आएगे उसमे ओके को सेलेक्ट करें

इसके बाद आपके फ़ोन से सारे एप्प के कैश क्लियर हो जाएंगे।

मेथड 2- स्विच ऑफ फ़ोन (By Switching off Phone)

फ़ोन से एप्प के कैश को क्लियर करने का एक और तरीका है जिससे आप एक साथ अपने फ़ोन के एप्प की कैश मेमोरी को क्लियर कर सकते है पर इसके लिए आपको अपने फ़ोन को स्विच ऑफ करना पड़ेगा।

स्टेप 1- सबसे पहले अपने फ़ोन को स्विच ऑफ कर लें।

स्टेप 2- उसके बाद आप पावर बटन, वॉल्यूम अप और मेन्यू (होम) बटन को एक साथ थोड़ी देर के लिए दबाए।

स्टेप 3- अब आपके फ़ोन में एक स्क्रीन दिखाए देगी जिसमे बहुत सारे ऑप्शन आएँगे उनमे से क्लियर कैश को सेलेक्ट करें। क्लियर कैश में जाने के लिए वॉल्यूम डाउन बटन का इस्तेमाल करें और उसे सेलेक्ट करने के लिए पावर बटन को दबाए।

स्टेप 4- जब आप पावर बटन को दबाएंगे उसके बाद अपने आप आपके फ़ोन से एप्प की कैश क्लियर हो जाएंगी।

स्टेप 5- जब आपके फ़ोन के एप्प की कैश मेमोरी क्लियर हो जाएंगी तब आपका फ़ोन में एक डायलॉग बॉक्स खुलेगा जिसमे आपको आपके कैश क्लियर का नोटिफिकेशन मिलेगा।

स्टेप 6- उसके बाद आपके फ़ोन अपने आप ऑन हो जाएगा और अगर आपके फ़ोन ऑन नही हुआ तो आपको बहुत सारे ऑप्शन दिखाए देंगे उसमे से रिबूट के ऑप्शन को पावर बटन से सेलेक्ट करें।

अब आपका फ़ोन अपने आप ऑन हो जाएगा और आपके एप्प के सारे कैश क्लियर हो जाएंगे।

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भारत की टॉप 10 टेबलेट जिनकी किमत 10000 तक है! www.gazabmedia.com


नई दिल्ली-  टॉप 10 एंड्राइड टेबलेट जिनकी कीमत 10000 तक है (Top 10 Android Tablets)

टेबलेट्स का इस्तेमाल हर कोई करता है। टेबलेट्स ज्यादातर गेम खेलने और विडियो कालिंग के काम आता है। ज्यादातर वही व्यक्ति टेबलेट खरीदते है जो ज्यादा गेम खेलते है या ज्यादा विडियो कालिंग करते है।

हर कंपनी ने अलग अलग टेबलेट्स बनाए है जिनमे कई सारे फीचर्स है। अगर आप 10,000  तक की रेंज में टेबलेट खरीदना चाहते है तो ऐसे कई सारे टेबलेट्स है जिनके फीचर्स अच्छे है।


1- आसुस गूगल नेक्सस 7 (Asus Google Nexus 7)

आसुस गूगल नेक्सस 7 टैबलेट में 7.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.2 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 1.2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।

आसुस गूगल नेक्सस 7की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 8 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.1

रैम (RAM)– 1जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.2 गीगाहर्ट्स

स्क्रीन (Screen)- 7 इंच

कैमरा (Camera)- 1.2 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा

बैटरी (Battery)- 4325 एमऐएच

2- ज़ोलो प्ले टैब 7.0 (Xolo Play Tab 7.0)

ज़ोलो प्ले टैब 7.0 टैबलेट में 7.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.3 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।
ज़ोलो प्ले टैब 7.0 की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 8 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.1

रैम (RAM)– 1जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.2 गीगाहर्ट्स

स्क्रीन (Screen)- 7 इंच

कैमरा (Camera)- 2 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा

बैटरी (Battery)- 4000 एमऐएच

3- डेल वेन्यू 7 (Dell Venue 7)

डेल वेन्यू 7 टैबलेट में 7.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.6 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 3 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।
डेल वेन्यू 7 की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 16 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.2

रैम (RAM)– 1जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.6 गीगाहर्ट्स

स्क्रीन (Screen)- 7 इंच

कैमरा (Camera)- 3 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा, 0.3 मेगा पिक्स्ल फ्रंट कैमरा

बैटरी (Battery)- 4100 एमऐएच

4- लेनोवो आईडियापैड टेबलेट ए1000 (Lenovo IdeaPad Tablet A1000)

लेनोवो आईडियापैड टेबलेट ए1000 टैबलेट में 7.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.2 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम है।
लेनोवो आईडियापैड टेबलेट ए1000 की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 4 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.1

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रैम (RAM)– 1जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.2 गीगाहर्ट्स

स्क्रीन (Screen)- 7 इंच

कैमरा (Camera)- 0.3 मेगा पिक्स्ल फ्रंट कैमरा

बैटरी (Battery)- 3500 एमऐएच

5- ज़ोलो क्यूसी800 टैब (Xolo QC800 Tab)

ज़ोलो क्यूसी800 टैब में 8.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.2 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।
ज़ोलो क्यूसी800 टैब की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 4 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.1

रैम (RAM)– 1जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.2 गीगाहर्ट्स

स्क्रीन (Screen)- 8 इंच

कैमरा (Camera)- 2 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा, 0.3 मेगा पिक्स्ल फ्रंट कैमरा

बैटरी (Battery)- 4000 एमऐएच

6- लेनोवो एस8-50एफ (Lenovo S8-50F)

लेनोवो एस8-50एफ में 8.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.9 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 2 जीबी रैम और 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।

लेनोवो एस8-50एफ की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 16 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.4

रैम (RAM)– 2 जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.9 गीगाहर्ट्स इंटेल एटम

स्क्रीन (Screen)- 8 इंच

कैमरा (Camera)- 8 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा, 1.2 मेगा पिक्स्ल फ्रंट कैमरा

बैटरी (Battery)- 4290 एमऐएच


7- डेल वेन्यू 8 प्रो (Dell Venue 8 Pro)

डेल वेन्यू 8 प्रो में 8.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.3 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 5 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।

डेल वेन्यू 8 प्रो की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 32 जीबी इंटरनल!

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– विंडो 10

रैम (RAM)– 1 जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.3 गीगाहर्ट्स इंटेल एटम

स्क्रीन (Screen)- 8 इंच

कैमरा (Camera)- 5 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा, 1.2 मेगा पिक्स्ल फ्रंट कैमरा

बैटरी (Battery)- 4830 एमऐएच

8- आसुस ज़ेनपैड सी (ASUS ZenPad C)

आसुस ज़ेनपैड सी में 8.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.2 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 5 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।

आसुस ज़ेनपैड सी की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 8 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 5.0

रैम (RAM)– 1 जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.2 गीगाहर्ट्स इंटेल एटम

स्क्रीन (Screen)- 7 इंच

कैमरा (Camera)- 5 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा, 0.3 मेगा पिक्स्ल फ्रंट कैमरा

बैटरी (Battery)- 3450 एमऐएच

9- लेनोवो टैब 2 ए7-30 (Lenovo Tab 2 A7-30)

लेनोवो टैब 2 ए7-30 में 7.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.3 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।

लेनोवो टैब 2 ए7-30 की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 16 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.4

रैम (RAM)– 1 जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.3 गीगाहर्ट्स इंटेल एटम

स्क्रीन (Screen)- 7 इंच

कैमरा (Camera)- 2 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा

बैटरी (Battery)- 3450 एमऐएच

10- एचपी 7 वौइस् टैब (HP 7 Voice Tab)

एचपी 7 वौइस् टैब में 7.0 इंच का डिस्प्ले है। इसमें 1.2 गीगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर के साथ 1 जीबी रैम और 5 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है।

एचपी 7 वौइस् टैब की मुख्य विशेषताएं

स्टोरेज (Storage)– 8 जीबी इंटरनल

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)– एंड्राइड वी 4.4

रैम (RAM)– 1 जीबी

प्रोसेसर (Processor)- 1.2 गीगाहर्ट्स इंटेल एटम

स्क्रीन (Screen)- 7 इंच

कैमरा (Camera)- 5 मेगा पिक्स्ल मेन कैमरा

बैटरी (Battery)- 3000 एमऐएच

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